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How To Get Published (Hindi)

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देखिये वैसे हिन्दी में छपना कोई बड़ी बात नहीं है। दिक्कत बस एक ही है कि बहुत से publisher author funded किताबें छापते हैं और छाप कर आपको दे देते हैं । किताब को बेचने से लेकर किताब के बारे में बताने कि ज़िम्मेदारी लेखक के भरोसे। जो भी किताबें ऐसे छपती है वो केवल अपने जानने वालों को गिफ़्ट देने के काम आती हैं, उनको ‘सप्रेम भेंट संस्कारण’ भी बोला जा सकता है और हाँ अगर आपके घर कोई आए तो आप शेख़ी बघार सकते हैं कि भाई आपकी किताब आ चुकी है

 
देखिये वैसे हिन्दी में छपना कोई बड़ी बात नहीं है। दिक्कत बस एक ही है कि बहुत से publisher author funded किताबें छापते हैं और छाप कर आपको दे देते हैं । किताब को बेचने से लेकर किताब के बारे में बताने कि ज़िम्मेदारी लेखक के भरोसे। जो भी किताबें ऐसे छपती है वो केवल अपने जानने वालों को गिफ़्ट देने के काम आती हैं, उनको ‘सप्रेम भेंट संस्कारण’ भी बोला जा सकता है और हाँ अगर आपके घर कोई आए तो आप शेख़ी बघार सकते हैं कि भाई आपकी किताब आ चुकी है। आप अब ऐसे वैसे नहीं रहे है अब आप समाज के बुद्दिजीवियों में शुमार हो गए हैं । आपकी किस्मत है अगर आपके यहाँ आने वाला अगर हिन्दी के साहित्य बारे में कुछ नहीं जनता होगा तब तो वो भी मिलकर बड़ा खुश होगा और आपके घर से चाय-वाय पीकर जब निकलेगा तो सोचेगा फलाने हिन्दी के लिए कितना काम कर रहे हैं।  वैसे भी आज कल कौन ही पढ़ता है हिन्दी-विन्दी लेकिन अगर आपकी किस्मत खराब हुई और आपके घर आने वाला कोई थोड़ा भी हिन्दी या हिन्दी किताबों का जानकार होगा तब आप शेख़ी नहीं बघार पाएंगे । वैसे भी जो किताबें दुनिया में कुछ जोड़ती नहीं उनको लिखे जाने न जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता । अब फैसला आपके हाथ है या तो सिर्फ वैसे मेहमान बुलाये जिससे आपको लेखक होने का भ्रम होता रहे और मेहमान को पाठक होने का ।
getting published

छपने हेतु आवश्यक बातें

अब चलते हैं दूसरी तरह के publishers के पास जो आपसे आपकी किताब कि पाण्डुलिपि(manuscript) मांगेंगे और भी हरी अनंत हरी कथा अनंता की तर्ज़ पर आप इंतज़ार करते रहिए । किताब के संबंध में कोई पत्राचार्य नहीं होगा ये बात उनकी website या ब्रोशर में पहले से लिखी होगी कहीं । ऐसे कई पब्लिशर से छपने के लिए पहले आप जो भी हिन्दी की प्रचलित किताबें हैं उनमें अपनी कहानियाँ भेजिये फिर ये पता करिए की निर्णायक मण्डल में कौन कौन से सदस्य हैं फिर उस सदस्य की सभी किताबों के नाम याद कर लीजिये और एक खरीद लीजिये ताकि जब आप उनसे मिलें तो उनका हस्ताक्षर ले लें और उनको बताएं कि सर/मैडम आपने फलानी किताब में जो लिख दिया वो मेरे लिए राम चरित मानस/गीता/कुरान है। रोज़ रात को सोने से पहले मैं उसको पढ़कर नहीं सोता इत्यादि इत्यादि । इसका एक फायदा ये होगा कि आपका उठना बैठना एक खास वर्ग के लोगों के साथ हो जाएगा । उस खास ग्रुप में पहले से कई सारे बुद्धिजीवी होंगे और कई आपके जैसे होंगे जो बुद्दिजीवी होने वाले होंगे। बस इस ग्रुप में आपका उठना अगर नियमित होने लगे तो तो बस आपका काम बस हो ही गया समझिए। एक आधे लोग आपके लिखे हुए की समीक्षा लिख देंगे और उस समीक्षा को पढ़ने वाले दुनिया में दो ही लोग होंगे एक आप और एक स्वयं लिखने वाला । बस अब थोड़े दिनों में आपकी किताब आ जाएगी हो सकता है कुछ सम्मान-वम्मान भी आपको मिल जाए क्यूंकी इस खास प्रकार के बुद्दिजीवी युवाओं को हिन्दी में अक्सर बहुत सम्मान मिलता है । अगर अब भी आपको लगता है कि आप ऊपर लिखे हुए दोनों तरह से किताब नहीं चाहते तो मेरे दोस्त आपका नयी वाली हिन्दी की दुनिया में आपका स्वागत है । आप कोई ऐसे publisher ढूंढिए जो कि आपके लिखे पर पैसा लगाने को तैयार हो और छपने के बाद किताब को सभी e-store (Flipkart, Infibeam, Ebay, Amazon, Snapdeal.ect)  पर उपलब्ध करा सके। वैसे भी एक आकड़े के मुताबिक हिंदुस्तान की 7% जनता अब शादी ऑनलाइन websites से करती है तो 100-200 रुपये की किताब में पाठक ज़्यादा नहीं सोचते और अब तो सभी वेबसीटेस किताबों की cash on delivery भी करती है तो चिंता की कोई बात नहीं अगर कोई आपका लिखा हुआ पढ़ना चाहेगा तो उस तक किताब पहुँचने में कोई दिक्कत नहीं होगी। मैं नीचे कुछ एक publication houses की लिस्ट* दे रहा हूँ आप अपनी मर्जी से उनमें से एक चुन सकते हैं वैसे भी हमेशा अपनी manuscript एक से ज़्यादा publisher को भेजना सही रहता है । Publication house चुनते हुए कुछ बातों का खयाल जरूर रखें
  • रॉयल्टी : वैसे तो MRP के 10-15% का रिवाज़ है लेकिन फिर भी आप ये अपने हिसाब तय कर सकते हैं
  • Promotion: किताब का प्रचार प्रसार करने के लिए पब्लिशर का क्या प्लान है ऐसा तो नहीं वो छाप कर भूल जाए
  • किताब के कवर और कागज़ : वैसे तो ये publisher का कम है लेकिन फिर भी आप इसपर जरूर धायन दें क्यूंकी ख़राब तरह से छपी हुई किताबें बहुत ख़राब लगती हैं
  • Pre-order: वैसे तो हिन्दी में ये concept अभी नया है लेकिन पिछले कुछ दिनो में इसने कुछ किताबों को बहुत फ़ायदा किया है । वैसे भी कई बार लोग author-signed कॉपी ही लेना चाहते हैं
  • Online/offline presence : जो दिखता नहीं वो बिकता नहीं ये बात यहाँ लागू होती है । अपने इतनी मेहनत की है तो वो सब तक पहुंचनी भी चाहिए इसलिए ये जरूर देख लें की किताब कहाँ से बिकेगी ऐसा न हो की किसी को किताब खरीदने में कोई भी दिक्कत हो
"और हाँ सबसे जरूरी बात कुछ ऐसा लिखिए जो लिखा जाना चाहिए केवल drawing room में सजाने के लिए किताब मत लिखिएगा ..."
बाकी इसके बाद भी कोई शक शुबा रह गया हो तो आप यहाँ संपर्क कर सकते हैं। चाय वाय पीने के लिए मैं कहीं भी और किसी भी हद तक जा सकता हूँ। अगर आपको आर्टिक्ल सही लगा हो तो अपने पास प्रिंटआउट लेकर रखें या न रखें लेकिन अपने ऐसे दोस्तों तक जरूर पहुँचा दे जो किताब लिखना चाहते हैं।
 

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दिव्य प्रकाश दुबे
दिव्य प्रकाश दुबे

मुसाफ़िर कैफ़े, मसाला चाय और टर्म्ज़ एंड कंडीशन अप्लाई नाम की तीन किताबें लिख चुका हूँ । कहने को एक बाप एक पति एक भाई एक दोस्त और एक टेलीकॉम कम्पनी में मार्केटिंग में काम करता हूँ। मेरी पहचान जो भी है किताबों से है और हाँ सबसे ज़रूरी बात मुझे कहानियाँ सुनने का शौक़ है। तो आप अपनी कहानी मुझे सुना सकते हैं । चिंता मत करिये मैं उसकी कहानी नहीं लिखूँगा। अगर लिख भी दी और आपका नाम नहीं डालूँगा।