How to write for Radio?

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सबसे पहले तो मैं आप सब से माफ़ी मांगता हूँ। इस टॉपिक पर बहुत दिनों से लिखना ड्यू था लेकिन आज जाकर मौका लगा। खैर, समय खराब न करते हुए सीधे टॉपिक पर आते हैं।

देखिये मैंने नीलेश मिश्रा के शो यादों का इडियट बॉक्स के लिए कुछ कहानियाँ लिखीं हैं। इसलिए सबसे पहले मैं उसके फ़ारमैट के बारे में बताता हूँ। हालाँकि रेडियो के लिए कहानियाँ करीब करीब वैसे ही होंगी बस फ़ारमैट के हिसाब से आपको थोड़ा बहुत परिवर्तन करना पड़ेगा।

यादों का इडियट बॉक्स के लिए मैंने एक कहानी लिखी थी। जिसका नाम Its Complicated था और लिंक (https://youtu.be/558M8056_Y0) ये रहा।

  1. नॉर्मल कहानी लिखने और रेडियो के लिए कहानी लिखने में एक बेसिक फर्क ये होता है कि रेडियो में कहानी की लंबाई बिलकुल एक जैसे होनी चाहिए। जैसे कि यादों का इडियट बॉक्स में कहानियाँ करीब 3600 शब्दों की होती थी।
  2. आपको शब्द पर इसलिए ध्यान देना पड़ता है क्यूंकी रेडियो के शो का टाइम फिक्स होता है। इसलिए उस हिसाब से आपको अपनी कहानी को बनाना पड़ता है।
  3. कहानियाँ 6 पार्ट/ सेगमेंट में होती है। जिसमें से शुरू के दो सेगमेंट इस बात के लिए होते हैं कि ये कहानियाँ किन कैरक्टर की हैं और ये क्या करते हैं। कुल मिलाकर आप ऐसे समझ लीजिये कि आपकी कहनी के कैरक्टर के बारे में जो कुछ भी जानने लायक है वो इस पार्ट में आ जानी चाहिए। एक और इंपोर्टेंट बात, आपको कहानी के शुरुवाती हिस्से में ही ये बताना पड़ेगा कि आपके कैरक्टर चाहते क्या हैं। क्यूंकि हर कहानी में कैरक्टर कुछ न कुछ चाहता है, चाहे वो एक कप चाय ही क्यों न हो। अगर आपका कैरक्टर कुछ नहीं चाहता तो उसकी कहानी बढ़ाना मुश्किल होता है।
  4. एक बार जब आपने ये establish कर दिया कि कैरक्टर कहाँ के हैं और चाहते क्या हैं। तो सेकंड सेगमेंट में ये आना चाहिये कि कहानी के हीरो और हिरोइन को जो चाहिये उसको हासिल करने में क्या क्या दिक्कत आ रही है। इस पार्ट में हीरो और हीरोइन का काम मुश्किल होना चाहिये। साथ में कहानी के सभी कैरक्टर की आपस में कैमिस्ट्रि भी निकल कर आनी चाहिये। कुल मिलाकर आपको कहानी ऐसे बढ़ानी चाहिये जैसे आप अपने किसी दोस्त के बारे में किसी को सुना रहे हैं। आप कहानी ऐसे बुनें जिसमें सुनने वाले को मज़ा आए, वो बोर न हो।
  5. आखिरी सेगमेंट सबसे इंपोर्टेंट है क्यूंकि कहानी का अंत हमारे साथ रह जाता है। यहाँ पर कहानी को आपको ऐसे ख़त्म करनी चाहिये ताकि आपके मन में कोई सवाल न बचे। सब कुछ मुद्दे जो आपने कहानी के शुरुवात में उठाए थे उन सबसे जवाब सुनने वाले को मिल जाएँ।
  6. कहानी लिखने के बाद आप अपने किसी दोस्त को कहानी सुनाएँ और उनका रिएक्शन लें। अगर कहानी किसी आम सुनने वाले को अच्छी लगेगी तो वो कहानी अच्छी बनी होगी। अगर सुनने के बाद सुनने वाले के मन में बहुत से सवाल हैं तो ये मान लीजिये कि आपको कहानी दुबारा लिखनी चाहिये।
  7. आपको रेडियो के लिए लिखते हुए ऐसे सोचना चाहिये कि आपके किसी दोस्त की आँख पर पट्टी बंधी है और अब आपको अपनी आँख से वो दुनिया देखते हुए उस दोस्त के सामने ऐसे बताना जैसे कि उसको ये दुनिया देखने के लिए आँखों की जरूरत ही न पड़े।
  8. मोटे तौर पर, कहानी लिखते हुए आपको ये सोचना चाहिये कि आप सब कुछ बता दें क्यूंकि रेडियो पर आदमी देख नहीं सुन रहा है। कोशिश करिए कि लिखते हुए आप जिस माहौल की कहानी कह रहे हैं तो वहाँ की आवाज़ें भी कहानी में महसूस हो। इससे कहानी सुनने वाला और भी ज़्यादा आपकी कहानी से कनैक्ट करेगा।
  9. रेडियो के लिए कहानी लिखते हुए बार-बार आप कहानी को ज़ोर ज़ोर से पढ़कर ही फ़ाइनल करें क्यूंकि इस बार कहानी पढ़ने के लिए नहीं बल्कि सुनाने के लिए लिखी गयी है।
  10. आप रेडियो के पुराने शो जरूर सुनें। थोड़ी सी मेहनत करके रेडियो में लिखकर अच्छा पैसा बनाया जा सकता है।

इसके अलावा आपके कोई सवाल हों तो मैं अगले आर्टिकल में कवर करने की कोशिश करूंगा।

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Cheers, दिव्य प्रकाश दुबे

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दिव्य प्रकाश दुबे
दिव्य प्रकाश दुबे

मुसाफ़िर कैफ़े, मसाला चाय और टर्म्ज़ एंड कंडीशन अप्लाई नाम की तीन किताबें लिख चुका हूँ । कहने को एक बाप एक पति एक भाई एक दोस्त और एक टेलीकॉम कम्पनी में मार्केटिंग में काम करता हूँ। मेरी पहचान जो भी है किताबों से है और हाँ सबसे ज़रूरी बात मुझे कहानियाँ सुनने का शौक़ है। तो आप अपनी कहानी मुझे सुना सकते हैं । चिंता मत करिये मैं उसकी कहानी नहीं लिखूँगा। अगर लिख भी दी और आपका नाम नहीं डालूँगा।