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Storybaazi – New Year Resolution

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आपकी कांटैक्ट लिस्ट में कुछ लोग होते हैं न जिनसे साल भर कोई बात न हुई हो लेकिन नया साल आया नहीं और उनके मैसेज आना शुरू। कोई त्योहार नहीं छोड़ते ये लोग। हर साल वही मैसेज। मेरी कांटैक्ट लिस्ट में ऐसे ही एक कार इनश्योरेंस वाले बंदे का नंबर था। उसको पता ही था साल में एक बार में कार की इनश्योरेंस होगी ही। इनश्योरेंस ख़तम होने के एक महीने पहले से वो फॉलो अप करने लगता था। उसका नाम मैंने ‘कार इंश्योरेंस’ नाम से सेव कर रखा था।

storybaazi - new year resolution

Storybaazi – New Year Resolution

वो ये मैसेज हर साल भेजता। नए साल में जो चीज़ मुझे सबसे ज़्यादा irritate करती है वो है नए साल पर आने वाले Happy new year के सैकड़ो मैसेज। हर मैसेज एक जैसा ही होता है बस मैसेज के नीचे नाम अलग होते हैं। कुछ मैसेज में तो लोग न केवल अपना नाम लिखते हैं बल्कि अपनी बीवी अपने बच्चे का नाम भी लिखते हैं। वो भी बिना अपनी बीवी और बच्चों से पूछे। नए साल पर व्हाट्स अप्प पर मैसेज भेजना उतना ही रूटीन काम है जैसे सुबह उठकर ब्रश करना, नहाना धोना नाश्ता करना। मुझे शुरू से ही लगता है कि ये सब मैसेज भेजना बहुत ही फालतू काम है। वैसे भी नए साल पर कुछ नया थोड़े हो जाता है।

इस चक्कर में हुआ ये कि मैंने पिछले साल एक न्यू इयर रेसोल्यूशन ले लिया कि चाहे जो हो जाये नये साल पर न किसी को मैसेज भेजूँगा और न ही किसी के मैसेज का रिप्लाइ करूँगा। रेसोलुशन ले तो लिया लेकिन पता चला कि मेरे बॉस का मैसेज आ गया। अब उसका रिप्लाइ न करें ऐसा तो हो नहीं सकता था। फिर मैंने अपनी फोन लिस्ट देखी और अपने मन में एक लिस्ट बना ली जिन लोगों से मुझे काम पड़ सकता था। उनको मैंने उनको नये साल का मैसेज भेज दिया। उनमे से कुछ लोगों को जवाब आया कुछ का नहीं आया। हम सब बहुत चालू पुर्जा लोग हैं ये बात हम जितना जल्दी मान लें उतनी ही लाइफ आसान हो जाती है। फालतू गिल्ट विल्ट नहीं होता। इसके बाद मैंने एक भी मैसेज का जवाब नहीं भेजा।

नया साल ठीक वैसे ही पुराना हो गया जैसे नया जूता कुछ दिनों में हो हो जाता है। हुआ क्या कि पिछले महीने मॉल में कार पे किसी ने डेंट मार दिया। मैंने कार बनने दी वहाँ पता चला कि कार का इनश्योरेंस expire कर चुका है। मुझे बड़ा गुस्सा आया मैंने इनश्योरेंस वाले लड़के को डांटने के लिए कॉल किया। कॉल किसी लड़की ने उठाया। मैं कार इनश्योरेंस वाले लड़के का नाम भूल चुका था। मैंने पूछा कि ये नंबर तो इनश्योरेंस वाले का हुआ करता था। उधर से आवाज़ आई, “जी उनका ही मैं आरती बोल रही हूँ उनकी वाइफ़। इनका गए हुए 6 महीने हो गए, मैं ही काम देखती हूँ अब। आप एड्रैस भेज दीजिये मैं किसी को भेज दूँगी”

फोन रखने से पहले मैं ये भी नहीं पूछ पाया कि आखिरी अमन को हुआ क्या था। मैंने एड्रैस भेजने के लिए जैसे ‘कार इनश्योरेंस’ वाला कांटैक्ट खोला तो देखा अमन का ये मैसेज पड़ा हुआ था।

“may god bless you a great, prosperous, blissful, healthy, bright, delightful, energetic and extremely Happy, Happy new year warm regards Aman, Aarti & Aayushi”

इस मेसगे का जवाब मैंने दिया नहीं था। मैंने अपनी कांटैक्ट लिस्ट एक बार पलटी तो देखा कितने लोगों के नाम ही नहीं थे। कोई दूधवाला था तो कोई धोभी कोई परचून वाला कोई ऑफिस बॉय, कोई एलेक्ट्रिशियन कोई प्लंबर कोई कारपेंटर कोई बाई वगेरह- वगेरह ।
मैंने इनश्योरेंस कार का नाम चेंज करके ‘आरती कार इनश्योरेंस’ कर दिया।

इस नये साल पर मैंने यही रेसोल्यूशन लिया है कि हर एक मैसेज का जवाब दूंगा और कोई भी नम्बर ‘नाम’ से सेव करूँगा केवल उनके काम से नहीं। वैसे भी नये साल पर बुरी आदत छोड़ने की बजाये कोई अच्छी आदत डालने का भी सोचना चाहिए।

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दिव्य प्रकाश दुबे
दिव्य प्रकाश दुबे

मुसाफ़िर कैफ़े, मसाला चाय और टर्म्ज़ एंड कंडीशन अप्लाई नाम की तीन किताबें लिख चुका हूँ । कहने को एक बाप एक पति एक भाई एक दोस्त और एक टेलीकॉम कम्पनी में मार्केटिंग में काम करता हूँ। मेरी पहचान जो भी है किताबों से है और हाँ सबसे ज़रूरी बात मुझे कहानियाँ सुनने का शौक़ है। तो आप अपनी कहानी मुझे सुना सकते हैं । चिंता मत करिये मैं उसकी कहानी नहीं लिखूँगा। अगर लिख भी दी और आपका नाम नहीं डालूँगा।