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मुझसे दो सवाल सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं ?

  1. किताब कैसे लिखें?
  2. किताब कैसे छपवाएँ?

किताब कैसे लिखें इसका जो भी जवाब मैं दूँगा वो झूठ होगा। हर किसी को अपना जवाब ढूँढना होता है। अगर आपने किताब लिख ली है तो उसको पब्लिकेशन हाउस को कैसे भेजें वो मैं बताने की कोशिश करता हूँ। हालाँकि किताब छपवाना अपने आप में जीवन का एक बड़ा निर्णय है इसलिये मेरी सलाह आँख बंद करके मत मानिएगा। मेरी सलाह को ठोक बजाकर देखने के बाद ही अमल में लाइएगा।

मोटे तौर पर तीन-चार तरह की किताब लिखी जाती है।

  1. कविता/ शायरी
  2. कहानी
  3. उपन्यास
  4. Non-fiction: (यात्रा वृतांत, जीवनी, मोटिवेश्नल)

इन सब में सबसे जल्दी और आसानी से कविता की किताब पूरी हो जाती है। मैं कविता लिखने वालों को depress न करते हुए बताना चाहता हूँ कि कविता की किताबें तब तक नहीं बिकती जब तक आप जावेद अख्तर, गुलज़ार, दुष्यंत कुमार, इरशाद कामिल, राहत इंदौरी या मुन्नवर राणा नहीं है। कविता की ज़्यादातर किताबें सेल्फ पब्लिश्ड होती हैं। मतलब कि प्रकाशक आपके पैसे से किताब छापता है। इसमें होता क्या है कि आप पब्लिकेशन हाउस को अपनी सबसे अच्छी 10 कवितायें भेज दें। वो आपको अपने हिसाब से बता देंगे कि वो आपकी किताब छाप रहे हैं या फिर आपको किताब सेल्फ पब्लिश करानी होगी। सेल्फ पब्लिशिंग को ऐसा कोई बुरा नहीं मानना चाहिए कि जैसे कोई पाप हो गया। असल मुद्दा ये है कि आपकी आर्ट ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचे। अगर आपकी किताब लोगों को छूएगी तो पब्लिशर को अपने आप आगे भी किताब छापते रहनी पड़ेगी। कविता की किताबें कम बिकती हैं इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है कि आप कहानी लिखने लगें। जिसमें आपका मन ज़्यादा अच्छे से लगता है वही आपको लिखना चाहिए।

कहानी की किताब छपवाने के लिए ज़्यादातर पब्लिशर आपसे आपकी 5 सबसे अच्छी कहानियाँ मांगते हैं। जैसे आप किताब के लिए बेचैन हैं ऐसे ही पब्लिशर भी अपने अगले बेस्ट सेलर लेखक की तलाश में होते हैं। कुछ लोग ये भी पूछते हैं कि कहानियाँ कितनी लंबी होनी चाहिए। इसका कोई एक सही जवाब नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि पिछले कुछ सालों में जिस तरह की किताबें ज़्यादा बिकी हैं, उसमें करीब 40-50 हज़ार शब्द थे करीब 8-10 कहानियाँ थीं। आप इस हिसाब से अपनी तैयारी कर सकते हैं। लेकिन ऐसे गणित लगाकर कहानी न ही लिखीं जाए तो बेहतर। ये भी हो सकता है कि आप 15 हज़ार शब्दों की तीन कहानियाँ लिखें।

उपन्यास और Non- fiction के लिए आपको अपनी किताब के करीब पाँच चैप्टर भेजने पड़ते हैं। उसके हिसाब से पब्लिशर आगे का निर्णय ले लेते हैं।

अब सवाल ये हो सकता है कि पब्लिशर कैसे चुनें। इसका सबसे आसान तरीका है की आप amazon पर जाकर किताबें देखें, वहाँ पब्लिशर डीटेल रहती है। आपको अपनी किताब जिस तरह की लगती है उसके पब्लिशर को कांटैक्ट करें। करीब करीब सभी पब्लिशर की डीटेल उनकी किताब में होती है नहीं तो थोड़ा सा गूगल करने पर वैबसाइट पर मिल जाती है।

जैसे ही आपकी किताब पब्लिशर को पसंद आएगी वो आपसे पूरी किताब मंगवाकर कांट्रैक्ट साइन कर लेंगे। कुछ पब्लिशर advance royalty भी देते हैं। पब्लिशर कैसे चुनें, कांट्रैक्ट, रॉयल्टी वगेरह पर अलग से लिखूंगा।

अगर आपको आर्टिकल सही लगा हो तो अपने पास प्रिंटआउट लेकर रखें या न रखें लेकिन अपने ऐसे दोस्तों तक जरूर पहुँचा दे जो किताब लिखना चाहते हैं।

With love, luck & light,

दिव्य प्रकाश दुबे

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दिव्य प्रकाश दुबे
दिव्य प्रकाश दुबे

मुसाफ़िर कैफ़े, मसाला चाय और टर्म्ज़ एंड कंडीशन अप्लाई नाम की तीन किताबें लिख चुका हूँ । कहने को एक बाप एक पति एक भाई एक दोस्त और एक टेलीकॉम कम्पनी में मार्केटिंग में काम करता हूँ। मेरी पहचान जो भी है किताबों से है और हाँ सबसे ज़रूरी बात मुझे कहानियाँ सुनने का शौक़ है। तो आप अपनी कहानी मुझे सुना सकते हैं । चिंता मत करिये मैं उसकी कहानी नहीं लिखूँगा। अगर लिख भी दी और आपका नाम नहीं डालूँगा।